:
Breaking News

Lalu Yadav Security News: लालू परिवार की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव, सरकार ने जारी किया नया आदेश

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

बिहार सरकार ने सुरक्षा समीक्षा के बाद लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और परिवार के अन्य सदस्यों की सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव किया है। फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

पटना/आलम की खबर:

बिहार की राजनीति में एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था का मुद्दा चर्चा के केंद्र में आ गया है। राज्य सरकार ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी तथा उनके परिवार के अन्य सदस्यों को उपलब्ध कराई जा रही सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के बाद नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। गृह विभाग की ओर से जारी आदेश के बाद राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर चर्चा तेज हो गई है।

सरकारी स्तर पर बताया गया है कि यह फैसला नियमित सुरक्षा मूल्यांकन प्रक्रिया के तहत लिया गया है। राज्य सुरक्षा समिति की बैठक में विभिन्न राजनीतिक नेताओं और विशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की गई थी। सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट और खतरे के आकलन के आधार पर नई व्यवस्था को मंजूरी दी गई है।

बिहार की राजनीति में लालू प्रसाद यादव का नाम दशकों से प्रभावशाली रहा है। सामाजिक न्याय की राजनीति को नई दिशा देने वाले नेताओं में उनकी गिनती होती है। वहीं राबड़ी देवी ने भी लंबे समय तक राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज भी राजद के संगठन और राजनीतिक गतिविधियों में परिवार की अहम भागीदारी बनी हुई है। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था में किए गए बदलाव को सामान्य प्रशासनिक निर्णय से अधिक राजनीतिक महत्व के साथ देखा जा रहा है।

नई व्यवस्था के तहत लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को सुरक्षा के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध रहेंगे। उनके आवास की सुरक्षा, अंगरक्षक, पायलट वाहन तथा अन्य जरूरी सुरक्षा प्रबंध जारी रहेंगे। हालांकि सुरक्षा ढांचे में कुछ बदलाव किए गए हैं, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चा का माहौल बन गया है।

सूत्रों के अनुसार सुरक्षा एजेंसियों ने हालिया परिस्थितियों और उपलब्ध इनपुट के आधार पर सुरक्षा व्यवस्था का पुनर्मूल्यांकन किया था। इसी रिपोर्ट के आधार पर यह निर्णय लिया गया। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा श्रेणियों का निर्धारण पूरी तरह पेशेवर मूल्यांकन पर आधारित होता है और इसमें राजनीतिक विचारधारा या दलगत आधार को शामिल नहीं किया जाता।

लालू परिवार के अन्य सदस्यों की सुरक्षा व्यवस्था का भी पुनः आकलन किया गया है। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राजद के प्रमुख नेता तेजस्वी यादव की सुरक्षा व्यवस्था यथावत रखी गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेजस्वी यादव वर्तमान में बिहार की राजनीति के सबसे सक्रिय नेताओं में शामिल हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा व्यवस्था पहले की तरह जारी रखी गई है।

उधर परिवार के अन्य सदस्यों को लेकर भी नई सुरक्षा व्यवस्था निर्धारित की गई है। सुरक्षा बलों की तैनाती, अंगरक्षकों की संख्या और अन्य सुरक्षा संसाधनों को सुरक्षा एजेंसियों की अनुशंसा के आधार पर पुनर्गठित किया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि सरकार सुरक्षा संसाधनों के उपयोग को नए सिरे से व्यवस्थित करने की कोशिश कर रही है।

बिहार में समय-समय पर विभिन्न नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जाती रही है। इससे पहले भी कई नेताओं की सुरक्षा श्रेणी में बदलाव हुए हैं। सुरक्षा एजेंसियां लगातार खतरे के स्तर का आकलन करती हैं और उसी के अनुरूप सुरक्षा उपलब्ध कराई जाती है। यही कारण है कि सुरक्षा व्यवस्था को एक गतिशील प्रक्रिया माना जाता है, जिसमें परिस्थितियों के अनुसार बदलाव संभव है।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बिहार जैसे राजनीतिक रूप से सक्रिय राज्य में सुरक्षा संबंधी फैसलों का राजनीतिक असर भी देखने को मिलता है। किसी बड़े नेता की सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव होने पर राजनीतिक दल अपनी-अपनी प्रतिक्रिया देते हैं और यह मुद्दा सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बन जाता है।

इस फैसले के बाद विपक्षी दलों की ओर से प्रतिक्रिया आने की संभावना भी जताई जा रही है। राजद समर्थकों के बीच भी इस विषय को लेकर चर्चा जारी है। हालांकि सरकार का स्पष्ट कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट और निर्धारित मानकों के आधार पर की गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा महत्वपूर्ण विषय होता है। सुरक्षा और संसाधनों के बीच संतुलन बनाना सरकार की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में समय-समय पर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा आवश्यक मानी जाती है।

फिलहाल गृह विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार नई व्यवस्था लागू कर दी गई है। संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि सुरक्षा प्रबंधों को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए और समय-समय पर स्थिति की समीक्षा भी जारी रखी जाए।

आने वाले दिनों में यह मुद्दा बिहार की राजनीति में चर्चा का विषय बना रह सकता है। राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं और जनता की राय के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि सुरक्षा व्यवस्था में किए गए इस बदलाव को किस रूप में देखा जाता है।

यह भी पढ़ें:

• बिहार में 61 राजस्व अधिकारियों का तबादला, भूमि सर्वेक्षण अभियान को मिलेगी नई रफ्तार

• पटना हाईकोर्ट की नई मुख्य न्यायाधीश बनीं मीनाक्षी एम राय

• बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर उम्मीदवारों के चयन पर मंथन तेज

और खबरें पढ़ें:

alamkikhabar.com⁠

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *